सोमवार, 6 जुलाई 2020

भाषा और पहचान

देश की भाषा …..

सम्मान की भाषा 

जिसके मस्तक बिंदी है , वो देश की भाषा हिंदी है 

ये मान है ,सम्मान है ,हर देशवासी का अभिमान है 

सिखा गई ये ज्ञान है ,ये देश की भाषा महान है 

दिला गई पहचान है ,यही तो हमारा सम्मान है ।

   लिखे गए हैं ग्रंथ इसमें ,कविता और कहानियाँ

   दिखा गई है इतिहास की अमिट ये निशानियाँ 

             बता गई महानता की वो छिपी कहानियाँ

        मिटा गई चित में बसी अज्ञानता की अँधियारियाँ।

जन - जन की बन गई पहचान ये भाषा 

बोलना और समझना भी तो  सिखा गई ये भाषा 

चलो तो शान से ,बढ़ो भी तो सम्मान से 

ये दिव्य ज्ञान भी तो बता गई ये भाषा ।

   विशालता तो इसके शब्दार्थ में भरी 

   भावुकता तो इसके हर भाव में भरी 

व्यक्ति के व्यक्तित्व का आधार है बनी 

मानव के हर विचार की आवाज़ है बनी 

इंसान में इंसानियत की पहचान है बनी ।

भाषा बिना न कोई अभिव्यक्ति ही  होती 

भावनाएँ दिल में दबी ही रही होती 

मानव और जानवर में अंतर नहीं होता 

बिन भाषा के ये जीवन बे -अर्थ ही होता ।

                करो सम्मान इस भाषा का 

               रखो मान इस भाषा का 

               माँ ने दिया है जो  ज्ञान इस भाषा का

                  कर दो विस्तार इस भाषा का ।


धन्यवाद ! 





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