मंगलवार, 31 मार्च 2020

नारी:तू कौन है ?


नारी :तू कौन है ?
किसी की माँ, किसी की बहू, 
किसी की बहन और किसी की प्रियतमा 
अनेकों रूप तेरे पर स्व की पहचान को ढूढ़ें।
हर रूप में तेरे कर्तव्य  ये समाज बताए
पर जब अधिकार की बात आए तो चुपचाप खड़ा हो जाए
घर का मान ,परिवार की इज़्ज़त ये सब तेरे हाथ 
पर संपति का भाग तेरे लिए नहीं,अब है  खड़ी तू खाली हाथ
मायके के लिए पराया धन है तू ,
पर ससुराल ने कभी अपना नहीं पाया ऐसा धन है तू 
जब धन ही हूँ मैं तो अपने और पराए का अर्थ नहीं
स्वयं में सक्षम हूँ किसी की करुणा की मोहताज नहीं
मायके में बोझ नहीं और ससुराल में कमज़ोर नहीं
जब घर चला सकती हूँ मैं तो क्या अपना पेट नहीं पाल सकूँगी ?
नारी को कमज़ोर समझने वालों ये समझ लो 
जो तुम्हें इस दुनिया में ला सकती है 
तो क्या स्वयं को चला नहीं सकती ?
अक्सर सुना कि महिला भावुक होती हैं
अगर भावुक नहीं होती तो माँ का रूप महान नहीं कहलाता 
भावुकता भाव है कमजोरी नहीं,
स्व से पहले दूसरों को रखना नारी की मर्ज़ी है 
कमियाँ निकालने से पहले अपने आप को देख लेना 
जो सीखा है कहीं न कहीं वो उसी की देन है 
नारी कमज़ोर नहीं सक्षम है ,
जब अपने पर आ जाए तो किसी से कम नहीं !!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Use of Technology in Education Boom or Bane

  Use of Technology in Education Boom or Bane Education is the medium through which a person learn about the languages, society ,science and...