स्वयं से सरोकार
स्व से स्व का संवाद ज़रूरी है
क्योंकि स्व का आधार जरूरी है
यही स्व की पहचान है ,मान है ,सम्मान है
बिना इसके स्व का जीवन बेनाम है ।
कभी अपने आप से बात कर लिया करो
क्योंकि तुम्हें तुमसे ज़्यादा कोई नहीं जानता
तुम्हें तुमसे ज़्यादा कोई नहीं पहचानता
स्व ही तुम्हें जानता है ,पहचानता है
बस ये स्व ही है जो
तुम्हें हर हाल में अपना मानता है ।
हँसी में ,खुशी में सब अपने हैं
पर गम में और तकलीफ में सब सपने हैं
तब स्व ही साथ है ,विश्वास है
गमों और तकलीफों से उबरने में साथ है ।
कभी पूछ लिया करो खुद से खुद का हाल
जान लिया करो खुद से खुद के मन की बात
दे लिया करो खुद को शाबाशी अपने आप
और डांट लिया करो खुद को कभी - कभार ।
करो प्यार अपने -आप से ,करो दुलार अपने आप को
न करो इंतज़ार दूसरों का ,बस सराहो अपने आप को
किया काम तुमने है ,पाया मुकाम तुमने है
सराहने का हक किसी और को क्यों दो
वो हक भी तो दो अपने आप को ।
सुनो मन की ,करो दिल की
न सुनो उनकी ,न करो उनकी
जो लगे सही ,करो वही ,डरो नहीं
जो डरा नहीं ,हटा नहीं ,डटा रहा ,बढ़ा वही ।
कभी पूछ लेना दिल से भी ,क्या पसन्द है उसकी
कर लेना वो जो दिल को हो पसंन्द कभी
तुम ही जानते हो हाल तुम्हारा
बाकी बस पूछते है हालचाल तुम्हारा
सच अपना सब स्वयं ही जानते हैं
दूसरे तो बस बाहरी आवरण पहचानते हैं ।
कभी फुर्सत के दो पल खुद के साथ बिताना
खुद को खुद से खुल कर मिलाना
दो पल खुशी के खुद के साथ बिताना
ऐसे ही खुद को खुद से मिलाना ।
धन्यवाद !
Good content 👍
जवाब देंहटाएंShould talk to our self
जवाब देंहटाएंVery nice 👍👌
जवाब देंहटाएंधन्यवाद !
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