सोमवार, 29 जून 2020

भारत देश :सौंदर्य है विशेष !


भारत देश : सौंदर्य है विशेष !


 भारत देश देता यही संदेश ,

रहो प्रेमभाव से , दूर रहो अलगाव से 

एकता आधार है ,विभिन्नता भंडार है 

बनी रही ये एकता ,बनी रही अखण्डता 

पड़े कभी न फूट यही है देश की विशेषता ।

  

पूर्व से पश्चिम तक,उत्तर से दक्षिण तक 
  देश का फैलाव है ,वहाँ अपना भू-भाग है 
अरुण से गुजरात तक ,कश्मीर से मद्रास तक 
देश का सीमांत है ,भारत का अखण्ड भाग है ।


शीश पर विराजे नग,पाँव को पखारे जल 

उदय हो सूर्य जहान में,वो देश ये महान है ।

धरा पे  विभिन्न भू-भाग हैं,जो सम्पन्नता के सार हैं 

कहीं पठार ,कहीं कछार ,कहीं पहाड़ विशाल हैं

उगा के धान भूमि पे ,लहरा रहा कमाल है ।


न एक धर्म, न एक जाति ,न एक भाषा ,न एक बोली 

विभिन्नता में एकता की यही अनूठी पहचान है 

अधिकार हैं  सभी को और कर्त्तव्य भी तो साथ हैं

अधिकार का प्रयोग कर ,कर्त्तव्य को भी पूर्ण कर 

बढ़ा रहे हैं देश को ,उन्नति की ओर को ।


ज्ञान का सागर भरा है ,वेद , गीता -पुराण में 

दे दिया जो शून्य था ,गणित के आधार को 

पूर्ण शिक्षा का पाठ ,पढ़ा दिया वो महान है 

नया ज्ञान सीख लो ,ये वेद जो महान हैं 

दिया है जो ज्ञान वो भी तो बेशुमार है ।


तिरंगा आन-वान है ,और देश की ये शान है 

लहरा रहा है धरा पे ये जो देश की पहचान है 

लिए पैगाम शांति ,उन्नति और क्रांति का 

बता रहा है हरिता का संदेश जो महान है 

बलिदान ,त्याग ,प्रेम का दे रहा पैगाम है ।


ये देश है विशाल ,विशालता आधार है 

न मिटा सका है देश को ,न डरा सका है देश को

महान है ये देश और महान विस्तार  है

झुके सभी के शीश है ,दिया सभी ने सम्मान है 

वीरों का ये देश है ,गौरवान्वित है ये महान है ।


धन्यवाद







शनिवार, 27 जून 2020

काश!वो दिन लौट आएं ......


काश ! वो दिन …… 

ये दौलत भी ले लो , ये शोहरत भी ले लो ।चाहे छीन लो  मुझसे  मेरी जवानी , मगर मुझको लौटा तो  बचपन का सावन , वो कागज़ की किस्ती , वो बारिश का पानी ,वो बारिश का पानी ……..

     जगजीत सिंह जी की ये ग़ज़ल आज लगभग सभी को अपने बचपन में ले जाती होगी ,जब वो इसे सुनते होंगें ।इस ग़ज़ल में जिस प्रकार के बचपन का वर्णन किया गया है ,उसे आज हम सब याद करते होंगें ।हम सभी कभी न कभी यह कहते हुए सुने जाते हैं ,“काश! हम बच्चे ही रहते ।बचपन में किसी बात की कोई चिंता और फिक्र नहीं होती थी ।बचपन ही अच्छा था ,बड़े होकर तो सिर्फ परेशानियाँ ही परेशानियाँ हैं ।” आज हम सभी अपने बचपन को याद करते हैं और खुश होते हैं  । बचपन के खेल- खिलौनें,मिठाई ,दोस्त -यार सभी याद आते हैं । यहाँ कुछ लोगों के साथ  अपवाद हो सकता है परंतु कुछ बातें तो उन्हें भी बचपन की अच्छी लगती होगी ,जो उन्हें याद आती होगीं ।

         आज के बच्चों के बचपन और हमारे बचपन में ज़मीन -आसमान का अंतर आ गया है  । हमारे समय में हम घर से बाहर जाकर खेलते थे ,अपने खेतों में जाते थे ।यदि घर में कोई मवेशी होता था तो उसे घास चराने लेकर जाते थे ।आजकल के बच्चे तो मवेशी का मतलब भी नहीं जानते होंगे । बचपन में जो दोस्त बनते थे वो किसी स्वार्थ सिद्धि के लिए नहीं बनाए जाते थे ,उनके साथ खेलने का रिश्ता होता था ।उनके साथ खेलने का मज़ा ही अलग होता था । वैसे ज्यादातर दोस्त तो हमारे भाई -बहन ही होते थे ,कोई ताऊजी के बच्चे ,कोई मामाजी के बच्चे ,कोई दूर की बुआजी के बच्चे । 

     बचपन के खिलौने और खेल भी निराले थे ,आज की तरह वीडियो गेम ,मोबाइल फ़ोन नहीं थे ।उस समय तो हर चीज खेल के लिए खिलौना बन जाती थी । गुल्ली -डंडा ,खो -खो ,कबड्डी ,आठ खाने,गिट्टे ,साइकिल के पहिए की दौड़ ,विष -अमृत ,कटी पतंग तेरा कौन - सा रंग ? ऊँच -नीच का पापड़ा, पोशम्पार, गुड्डा -गुड़िया का खेल ,गैलेरी ,इलास्टिक (यह सर्दियों में ज्यादा खेला जाता था ) ,पकड़म-पकड़ाई और न जाने कितने खेल ….. ? सभी इन्हें खेल कर ऐसे खुश होते थे मानो ताजमहल मिल गया हो ! पर सच तो यही है कि ये खेल जो खुशी देते थे वो शायद ताजमहल मिलने से भी अधिक थी । दिन भर धमा -चौकड़ी मचाने के बाद रात में सोने से पहले मम्मी या दादीजी /नानीजी से एक कहानी तो रोज़ ही सुननी होती थी ।नानी और दादीजी कैसी कहानी सुनाती थी वैसी मम्मी नहीं सुना पाती थीं ,कहानी सुनकर यह भी कहते थे आपको नानीजी या दादीजी जैसी कहानी नहीं आती । उनके द्वारा सुनाई गई कहानियाँ भी कल्पना से परे की दुनिया में की होती थीं । जो कहानी हमें सबसे अच्छी लगती थी उसे बार -बार सुनने की ज़िद तो सभी ने की होगी !

       पुराने समय में घर बड़े -बड़े होते थे और लगभग सभी रिश्तेदार पास -पास ही रहते थे ।गाँवों में तो एक ही घर में रहते थे ,संयुक्त परिवार के रूप में और शहरों में एक ही गली में ।तब अपने और अपने ताऊ -चाचा के घरों में अंतर करना अधिक था ।जहाँ भी जाओ अपनापन ही महसूस होता था ।उस समय खाने के लिए ये बर्गर ,पिज़्ज़ा ,मैगी, पास्ता नहीं होता था पर कभी हलवा, चीले, सत्तू ,शकरकंद की चाट, मटर चाट, पकौड़े ,तड़के वाली दाल, मक्के या बाजरे की रोटी ,सरसों या चने का साग खाने का मजा ही कुछ और था अब लोग बड़े और महंगे होटलों में ये खाना खाने के लिए हजारों रुपए खर्च करते हैं । पूरा गाँव या मोहल्ला एक परिवार सा लगता था । सभी एक दूसरे के सुख -दुख में एक साथ खड़े रहते थे ।

       अब ऐसे बचपन की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है ।अब बच्चों का दिन टेलीविजन या मोबाइल से शुरू होता है और उसी में खत्म हो जाता है ।खाने के नाम पर बर्गर,पिज़्ज़ा सैंडविच यही पसंन्द है आजकल के बच्चों की । एकल परिवार में रहने के कारण पारिवारिक प्रेम और दादा -दादीजी ,नाना -नानीजी के प्यार से वंचित होते जा रहे हैं बच्चे ।इस प्रकार से रहने जे कारण वे सिर्फ अपने लिए ही सोचते हैं ।अतः अब माता -पिता होने के नाते हमें उन्हें अच्छा पारिवारिक परिवेश देने की आवश्यकता है ताकि उनका बचपन समय से पहले ही खत्म न हो जाए। 

धन्यवाद !

       

मंगलवार, 23 जून 2020

वक्त और उम्मीद

 

उम्मीद …………

धरा और अंबर , नदी  ये पहाड़ 

बता रहे हैं जीवन का सार 

 रखो जीनव में संयम अपार ,

बना लो इसे ही  जीवन का आधार ।


समय है ये जो बदलने चला है 

न तेरा ,न मेरा ये तो स्व मन से चला है

न रुका है ,न रुकेगा 

ये चला और ये चलेगा 

न ठहरा किसी का 

न रुका है किसी पे 

चला चक्र अपना ,

मिला है सभी से

दिया सुख किसीको तो ,

किसी को छला है 

तौला सभी को तराजू में अपनी 

जहाँ जो कमी थी ,उसे वो दिया है 

कसौटी पे अपनी चढ़ाया सभी को 

उतारा खरा , तो गिराया किसी को ।


नदी जो भरी थी ,अब सूखी पड़ी है 

वन जो हरे थे , वो बंजर पड़े हैं 

धरा पे जमीं ,  अब  ये ऊसर पड़ी है 

रहा न समय वो ,बस उम्मीद ही रही है 

आशा का दामन फैलाए रही है 

बस उम्मीद ही है जो बचाए खड़ी है ।


 जो बना है , वो मिटा है 

और मिटने के बाद फिर से बना है 

जो चला है ,वही तो गिरा है 

गिरने के बाद संभल कर चला है 

जो सिखाया समय ने ,वही तो भला है 

नया भाग जीवन में तभी तो जुड़ा है 

गर आया बुरा काल,फिर क्यों डरा है

ये वक्त ही  है जो  स्थिर कब  रहा है ?


जो आया बुरा काल,तो कट भी गया है 

सिखा के नया पाठ ही तो गया है 

अपने -पराए में अंतर करा के

चला गया है ये चिंतन करा के 

बताया नया है और सिखाया भला है 

और ये वक्त आखिर गुज़र ही गया है ।


दीया तुम उम्मीद का जलाए ही रखना 

आशा को ऊपर उठाए ही रखना 

न डरना किसी हालात में कभी भी 

बुरा वक्त गुज़रे ये उम्मीद बनाए ही रखना 

उम्मीद का दीया तुम जलाए ही रखना ।


धन्यवाद !!



 


रविवार, 21 जून 2020

सोशल मीडिया.....

सोशल मीडिया  का आधुनिक युग पर प्रभाव….

     सोशल मीडया यानि समाज में संचार का 

माध्यम ।समाज में सूचना संचार के अनेक माध्यम हैं ।लोगों द्वारा सूचना एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँच जाती हैं । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है ,उसे समाज में एक -दूसरे के साथ मिलजुल कर रहना होता है ।दूसरे व्यक्ति के  दुख,खुशी ,तकलीफ़ आदि में शामिल होना होता है ।मनुष्य पारिवारिक प्राणी भी है ,वह परिवार में रहता है ।परिवार का कोई सदस्य घर से दूर भी रहता है ,उससे संपर्क फोन या खत के माध्यम से होता है ।

       प्राचीन काल में संचार के माध्यम सीमित थे ।एक स्थान से सूचना खत के माध्यम से दूसरे स्थान तक 

पहुँचाई जाती थी । इसमें बहुत अधिक समय लगता था ।धीरे -धीरे टेलीफोन का उपयोग होने लगा ।एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के साथ मौखिक वार्तालाप होने लगा ।व्यक्ति बहुत कम समय में जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने लगा ।अब सूचना का  संचार तेज़ हो गया ।धीरे -धीरे संचार के माध्यमों में तेज़ी आती गई और 21वी सदी आते -आते सूचना संचार के क्षेत्र में क्रांति आ गई ।संचार के अनेक माध्यमों का विकास हो गया । फोन की अनेक कम्पनियाँ बाज़ार में आ गई और इंटरनेट ने दो देशों की दूरी को भी संचार के साधनों के माध्यमों से कम कर दी । अब लोग एक देश में बैठे -बैठे दूसरे देश में सूचना का संचार करने लगे ।इस कार्य को संभव बनाया सोशल मीडया के साधनों ने ।अब यह जानना आवश्यक हो जाता है कि सोशल मीडिया आखिरकार है क्या ?

# सोशल मीडिया क्या है ?

सूचना के संचार का ऐसा  माध्यम जो फोन, कम्प्यूटर और टेलीविजन के माध्यम से होता है ।इन माध्यमों से सूचना बहुत कम समय में बहुत अधिक जनसंख्या तक पहुँच जाती है । सोशल मीडिया के माध्यम से हम घर में बैठे -बैठे देश -विदेश में घटित होने वाली घटनाओं की जानकारी प्राप्त करते हैं ।सोशल मीडिया के अनेक माध्यम हैं जैसे -फ़ेसबुक, वाट्सअप, ट्वीटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब , डेलिमोशन,जी-मेल आदि ।

         सोशल मीडिया से पहले हमें मीडिया के बारे में बात करनी चाहिए ।मीडिया का अर्थ है संचार का माध्यम ।सूचनाओं को लिखित या मौखिक रूप में लोगों तक पहुँचाना । मीडिया दो प्रकार की होती है -प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ।प्रिंट के अंतर्गत अख़बार, पत्रिकाएँ आदि आते हैं और इलेक्ट्रॉनिक के अंतर्गत टेलीविजन आता है ।

         सोशल मीडिया के अनेक प्रकार् हैं जिनके माध्यम से सूचनाओं का संचार होता है ।इन माध्यमों में कुछ व्यक्तिगत माध्यम हैं और कुछ सामाजिक स्तर के माध्यम हैं ।इन प्रकारों पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करते हैं ।


# व्यक्तिगत संचार के माध्यम 


क) वाट्सअप -यह संचार का एक व्यक्तिगत माध्यम 

है ।इसके द्वारा व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को संदेश भेज सकता है ।उसे फोन कर सकता है और वीडियो कॉल भी कर सकता है ।इस माध्यम से की गई बातचीत सिर्फ उसी व्यक्ति तक सीमित रहती है जिस से बात करी गई है । 


ख) फेसबुक और इंस्टाग्राम - ये भी संचार के व्यक्तिगत माध्यम हैं ,आप अपनी जानकारी जिस व्यक्ति से साझा करना चाहते हो आप उसे ही अपने दोस्तों के समूह में जोड़ें ,बाकी अन्य कोई आपकी जानकारी नहीं देख पायेगा ।इन दोनों माध्यमों में भी व्यक्तिगत स्तर पर संदेश भेजने की सुविधा होती है ।


ग) स्काईप /ज़ूम/ गूगल डुओ - सोशल मीडिया के यह साधन व्यक्तिगत तरीके हैं । इनके माध्यम से व्यक्तिगत संदेशों का संचार होता है । लोगों द्वारा एक से अधिक जानकार लोगों के साथ भी एक साथ संपर्क किया जा सकता है ।इन माध्यमों से हम अपने जरूरी कागज़ात भी दूसरे व्यक्तियों के साथ बाँट सकते हैं ।


# संचार के सामाजिक स्तर के  साधन 

क) यूट्यूब / डेलिमोशन - इन माध्यमों से हम उपयोगी जानकारी को वीडियो के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं । जानकर व्यक्ति इन माध्यमों पर अपने वीडियो बना कर अपलोड करते हैं ,ताकि अन्य व्यक्ति उन्हें देखकर जानकारी प्राप्त कर सकें । यहाँ पर हर प्रकार की जानकारी उपलब्ध हो जाती है ।


ख) टिककॉक / हेलो /वी -वीडियो /स्नैपचैट  आदि -  इन माध्यमों पर  व्यक्ति विभिन्न प्रकार से वीडियो बना कर अपलोड करते हैं ।दूसरे लोग उन वीडियो को देखते हैं और उन्हें पसंद करते हैं ,और दूसरे लोगों तक भेजते हैं । इन पर कुछ ज्ञानवर्धक वीडियो मिलते हैं ,परन्तु कुछ असामाजिक वीडियो भी इन माध्यमों पर होते हैं जो समाज में अराजकता फैलाने का काम करते हैं ।


ग) ऑनलाइन गेमिंग एप - आज कल ऑनलाइन गेमिंग का चलन बहुत अधिक बढ़ गया है ।लोग अपने मनोरंजन के लिए ऑनलाइन खेल खेलते रहते हैं । पहले सिर्फ अकेले ही खेल खेले जाते थे परंतु अब कई खेल ऐसे हैं जो समूह में भी खेले जाते हैं । लोग दूसरे शहर में बैठे अपने मित्रों और सगे- सम्बंधियों के साथ मिलकर खेल सकते हैं ।


घ ) शिक्षा प्रदान करने वाले एप जैसे -बाईजू , अनअकेडमी, वेदांतु आदि - आज के समय में ऑनलाइन टीचिंग का चलन बढ़ता जा रहा है । विभिन्न ऑनलाइन टीचिंग एप का चलन आजकल लोकप्रिय हो रहा है ।ये एप शिक्षा प्रदान करने के साथ -साथ कमाई का भी जरिया बन गए हैं ।बच्चों को घर बैठे -बैठे मोबाइल / कम्प्यूटर पर शिक्षा मिलती है और वहाँ पढ़ाने वाले शिक्षकों को पैसा । इस से दोनों को लाभ होता है । 


ङ) ट्वीटर - ट्वीटर सूचना संचार का अत्यधिक तीव्र और फैला हुआ माध्यम है । इस माध्यम से सूचनाओं का आदान -प्रदान विश्व के किसी भी भाग में किया जा सकता है । लोग इस माध्यम पर कोई जानकारी साँझा करते हैं तो वह जानकारी विश्व के किसी भी भाग में देखी व पढ़ी जा सकती है । आप किसी भी भाषा में कोई भी जानकारी साँझा कर सकते हैं ।


च) ऑनलाइन न्यूज़ चैनल एप - टेलीविजन पर आने वाले लगभग प्रेत्यक न्यूज़ चैनल ने अपना ऑनलाइन न्यूज चैनल एप बना दिया है । ये एप आप अपने फोन या कम्प्यूटर पर कहीं भी और कभी भी देख सकते हो । लोगों के पास समय की कमी होने के कारण बैठ कर टेलीविजन देखने का समय बहुत कम हो गया है इसलिए वे इन एप का प्रयोग करते हैं ।


छ) टी. वी. के ऑनलाइन एप जैसे -ज़ी 5,नेटफ्लिक्स ,वूट आदि -अनेक टेलीविजन चैनल ने भी अपने ऑनलाइन एप शुरू किए हैं ,इन पर अनेक नाटक आते हैं ।इन पर सीरीज नाम से कुछ नए नाटक भी प्रसारित किए जाते हैं जो आज के युवा वर्ग को बहुत पसंद आते हैं ।


ज) सर्च इंजन जैसे -गूगल ,याहू  , विंग्स आदि - इंटरनेट पर हम किसी भी विषय पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । गूगल तो आजकल हर  प्रश्न का उत्तर सैकंडों में दे देता है । 


         सोशल मीडिया का प्रयोग दिन -प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है ।लोग इन माध्यमों के आदी हो गए हैं ।प्रत्येक वस्तु अपने साथ लाभ और हानि साथ लेकर चलती है ।  इसी प्रकार सोशल मीडिया की भी कुछ लाभ और कुछ हानियाँ हैं ।आइए, इन लाभ और हानियों पर प्रकाश डालते हैं ।


सोशल मीडिया के लाभ :-

  1. सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से हमें घर में बैठे -बैठे देश -विदेश की जानकारी प्राप्त हो जाती है ।यह जानकारी हमें जागरूक नागरिक बनने में मदद करती 

है ।

  1. ये माध्यम हमारे मनोरंजन के लिए भी सहायक होते हैं ।इन पर अनेक प्रकार के नाटक व कहानियों का प्रसारण होता है जो हमारा मनोरंजन करते हैं ।

  2. सोशल मीडिया के अनेक माध्यम हमारा ज्ञानवर्धन भी करते हैं । सोशल मीडिया पर अनेक ऐसे एप हैं जो हमारे ज्ञान में वृद्धि करते हैं।हम अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारी इन पर खोज सकते हैं और उसे पढ़ कर अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकते हैं ।

  3. सोशल मीडिया के अनेक माध्यम जैसे वाट्सअप,फेसबुक,इंस्टाग्राम आदि से हम अपने मित्रों और सगे-सम्बन्धियों से बातचीत कर सकते हैं ,उन्हें फोटो दिखा सकते हैं और उनकी भी फ़ोटो देख सकते हैं । इनके माध्यम से हम एक -दूसरे से सम्पर्क में रहते हैं और हम एक -दूसरे से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

  4. सोशल मीडिया के अनेक ऐसे माध्यम हैं जो व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करते हैं ।आप अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं ।

  5. इन माध्यमों का प्रयोग करके हम अपनी प्रतिभा का भी प्रदर्शन कर सकते हैं।हम अपने स्वयं की कला को बढ़ाने के लिए उसका वीडियो बनाकर किसी भी सोशल मीडिया के स्तर पर डाल सकते हैं ।लोग वहाँ से आपकी प्रतिभा को देखकर सराहेंगे और आप की प्रतिभा का प्रचार -प्रसार होगा ।

  6. सोशल मीडिया की सहायता से अब समाज में पारदर्शिता का प्रसार हुआ है ।देश -विदेश में घटित होने वाली सभी घटनाओं को आम जनता के समक्ष लाने का काम इन्हीं माध्यमों ने किया है ।इनके माध्यम से आम जनता भी सभी जानकारियों को सही प्रकार से प्राप्त करने में सक्षम हो पाई है ।

  7. सोशल मीडिया का प्रयोग आय अर्जन के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है । बहुत से लोग सोशल मीडिया के अनेक साधनों का प्रयोग करके कमाई भी कर रहे हैं ।


सोशल मीडिया से पड़ने वाले दुष्प्रभाव 

क) सोशल मीडिया पर जो जानकारी दिखाई जाती है उस में व्यक्तिगत भेदभाव हो सकता है । कोई जानकारी किसी के पक्ष में और दूसरे के विरोध में हो सकती है । जो समाज के कुछ वर्गों के मष्तिक पर बुरा प्रभाव डाल सकती है ।


ख) सोशल मीडिया पर हर आयु वर्ग के अनुसार जानकारी उपलब्ध होती है । पर कुछ जानकारी छोटे आयु वर्ग के बच्चों के लिए सही नहीं होती है ।जानकारी का उम्र के अनुसार विभाजन सोशल मीडिया पर नहीं है अतः किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की जानकारी ढूंढ सकता है और पढ़ सकता है ।


ग) सोशल मीडिया पर कम उम्र के बच्चे चैट ग्रुप बना कर आपस में असामाजिक बातें करते हैं और असामाजिक कृत करने की योजनाएं नही बना लेते है ,जैसा कि इंस्टाग्राम पर बने बॉयज लॉकर नामक समूह में हुआ । ऐसे समूह छोटे बच्चों की मानसिकता को विकृत कर देते हैं।इससे उनके नैतिक मूल्यों का पतन होता दिखाई देता है । 


घ) ऑनलाइन गेमिंग साइट पर खेल खेल कर बच्चों का स्वभाव आक्रामक होता जा रहा है । गेम में लड़ाई - झगड़ा ,मार -काट आदि दिखाई जाती है जो बच्चों के मन में भी आक्रोश का भाव भर देते  हैं । ऐसे बच्चे घर में ,खेल के मैदान में या स्कूल में उस आक्रामक स्वभाव का प्रदर्शन करते हैं ।जो उनके मानसिक व शारीरिक विकास के लिए हानिकारक सिद्ध होता है । 


ङ) टी.वी .पर दिखाई गई फिल्मों के कुछ दृश्यों को देखकर लोगों की मानसिकता विकृत हो जाती है ।वे कुछ असामाजिक और आमानविक कार्यों में लिप्त हो जाते हैं जैसे चोरी, डकैती ,बालात्कार, तेजाब फेंकना आदि।ये समाज के लिए हानिकारक है । 


च) कुछ लोग साइबर क्राइम में भी लिप्त हो 

जाते हैं । लोगों के व्यक्तिगत एकाउंट को हैक कर के उनकी महत्त्वपूर्ण जानकारी का दुरुपयोग करते हैं ।वे लोग उस जानकारी को लौटाने के बदले अच्छी खासी मोटी रकम भी लोगों से लेते हैं ।


छ) जब से  बैंकों द्वारा ऑनलाइन सुविधा देने प्रारम्भ किया है तब से बैंक एकाउंट में भी घोटाले होने लगे है ।अपराधी प्रवत्ति के लोगों के इंटरनेट म् माध्यम से इन से पैसे निकालने और एकाउंट हैक करना शुरू कर दिया है ।ये बहुत ही हानिकारण है ।


ज) सोशल मीडिया के एकाउंट पर वायरस के हमले का खतरा बढ़ता जा रहा है ।हैकर एकाउंट हैक करके फ़ोटो तथा अन्य जानकारी दूसरी जगह पर भेज देते हैं ।कई बार उस जानकारी का दुरुपयोग किया जाता है । 

        विज्ञान का प्रत्येक आविष्कार अपने साथ लाभ और हानि दोनों ही लाता है ।अब ये हमारी समझ पर निर्भर करता है कि हम उस आविष्कार का सदुपयोग करें या दुरुपयोग ।सदुपयोग हमें उन्नति की ओर ले जाएगा और दुरुपयोग पतन की ओर ।सभी को अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए अपनी उचित आवश्यकता की पूर्ति के लिए इन साधनों का सदुपयोग करना चाहिए। हम मानव इसीलिए कहे जाते हैं क्योंकि हम अपनी बुद्धि व विवेक का प्रयोग करके सही निर्णय ले सकते हैं ।यदि हम उसका सही प्रयोग नहीं करते तो हम में और जानवर में कोई अंतर नहीं रह जायेगा ।

        धन्यवाद !


Legend of Suheldev :The king who saved India https://www.amazon.in/dp/9387894037/ref=cm_sw_r_wa_apa_i_Zl5-EbB98ZP7F

बुधवार, 17 जून 2020

स्वस्थ तन ,स्वस्थ मन


हम अपने तन और मन को कैसे स्वस्थ रख सकते हैं?

   “स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है ”-यह सच है यदि मनुष्य शारीरिक रूप से स्वस्थ्य होता है तो वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ होता है ।यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसका मन भी कहीं नहीं लगता ,उसका मन विचलित ही रहता है । आज के समय में मनुष्य को शारीरिक तथा मानसिक दोनों रूपों से स्वस्थ्य होना अति आवश्यक है । मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति कुछ ऐसे कदम उठा लेता है जो उसके जीवन के लिए हानिकारक सिद्ध होता है । मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति तनाव की समस्या से जूझता है ।मानव को सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहने की आवश्यकता नहीं है उसे मानसिक रूप से भी स्वस्थ्य रहना अतिआवश्यक है । 

      

मनुष्य को शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए :-

  1. पौष्टिक भोजन खाना - अपने शरीर को हष्टपुष्ट और तंदुरुस्त रखने के लिए हमें पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए । उचित भोज्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए । जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए ।

  2. निरन्तर व्यायाम करना - अपने शरीर को ताकत प्रदान करने के लिए हमें निरन्तर व्यायाम करना चाहिए ।व्यायाम करने से हमारा वजन नहीं बढ़ता ,हमें मोटापा नहीं होता ,माँसपेशियाँ मज़बूत होती हैं ।व्यायाम करने से हमें आलस्य महसूस नहीं होता।हमारा शरीर तरोताज़ा महसूस करता है ।

  3. भोजन में विटामिन सी (C) ,विटामिन डी(D) व जिंक का प्रयोग करना - विटामिन सी हमारे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता का विकास करती है ।यह हमारी प्रतिरोधक क्षमता का विकास करती है और हमें रोगों से लड़ने में सहायता करती है ।हमें अधिक से अधिक मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए ।विटामिन सी मुख्य रूप से आँवला, नींबू और अभी खट्टी वस्तुओं में पाया जाता है ।विटामिन सी से साथ -साथ विटामिन डी भी हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है ।यह हमारी हड्डियों को मजबूत करती है ।सुबह की धूप हमारे शरीर में विटामिन डी के निर्माण में सहायक सिद्ध होती है ।जिंक हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ।हमें इन सभी पोषक तत्वों का उचित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए ।

  4. स्वच्छता का ध्यान रखना -हमें अपने शरीर और अपने आस-पास की सफाई जा भी ध्यान रखना अति आवश्यक है ।शरीर की सफाई के लिए प्रतिदिन स्नान करना ,समय -समय पर हाथ धोना ,भोजन करने से पहले और खाना खाने के बाद हाथों को साबुन से धोना बहुत जरूरी है । अपने शरीर की सफाई के साथ -साथ अपने आसपास को भी साफ़-सुथरा रखना आवश्यक है ।

 

मनुष्य को मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए भी कुछ बातों को ध्यान में रखना अतिआवश्यक है ,जो इस प्रकार हैं -


क) सकारात्मक सोच रखना -हमें अपने मन को स्वस्थ्य रखने के लिए सकारात्मक सोच और रवैया रखना बहुत जरूरी है । हमें प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक पक्ष देखना चाहिए । नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए ।

ख) योग करना -जब मनुष्य के जीवन में कुछ दुख व तकलीफ आती हैं तो वह विचलित हो जाता है ।उसे कोई भी रास्ता दिखाई नहीं देता ।ऐसे समय में मनुष्य को अपना मन शांत रखने की आवश्यकता होती है ।मन को शांत करने के लिए योग आसन करने चाहिए ।योग करने से मन शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है ।

ग) कोई रचनात्मक कार्य करना - यदि कोई व्यक्ति तनाव में हो और उसे कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा हो तब उसे अपने आपको ऐसे कार्यों में व्यस्त रखना चाहिए जो उसे करने पसंन्द हों ,जैसे उपन्यास पढ़ना,बागवानी करना ,चित्र बनाने ,कहानी या कवियाएँ लिखना आदि ।जब मनुष्य व्यस्त रहता है तब उसे व्यर्थ की बातें सोचने का समय नहीं मिलता ।

घ) विश्वास रखना - बुरे समय में हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि यदि अच्छा समय नहीं रहा ,तो बुरा समय भी नहीं रहेगा ।समय परिवर्तन संसार का नियम है ।यदि हमारे लिए एक रास्ता बंद हो गया है तो कोई न कोई दूसरा रास्ता अवश्य खुला होगा ।हमें अपने ऊपर और अपने ईष्ट पर विश्वास रखना चाहिए ।

    हमें सकारात्मक रहना चाहिए ,इसी से हम अपने मन और तन दोनों को स्वथ्य रख सकते हैं ।


धन्यवाद !

       


सोमवार, 15 जून 2020

शिक्षक




ज्ञान का भंडार .........
शिक्षक वह अवतार 


ज्ञान से भरा है जो,प्रश्नों से घिरा हैवो 

दे रहा है ज्ञान वो ,बना रहा महान वो 

हर प्रश्न को हल करे, हम में हौसला भरे 

जला के ज्ञान का दिया ,आगे बढ़ा बढ़े चला ।

      बना के शिक्षित हमें ,दिखा गए वो  राह नई 

     सिखा दिया सही -गलत ,बता दिया भला -बुरा 

    देकर गए वो ज्ञान जो ,दिला गया सम्मान वो 

    न चाह कुछ भी कभी,बस चाह ये सम्मान दो।

न बैर है, न द्वेष है इसी से वो विशेष है 

मिले सभी को  उन्नति ,यही बस उद्देश्य है 

 दी होगी सज़ा भी रोष में ,कहा होगा आवेश में

पर सब किया था जो कभी ,वो था हमारे प्रेम में।

      आज का युवा अभी से भूल गया वो उपदेश है 

     गुरु का मान सर्वोपरि ,जो ईश्वर ने दिया सन्देश है 

     मान और सम्मान का इच्छुक है वो विशेष है 

     दे दो उसे वो मान जो उसे सबसे प्रिय भेंट हो ।।

      

         धन्यवाद !

रविवार, 14 जून 2020

प्रकृति माँ...... जग की माँ

प्रकृति माँ.......जग की माँ

दिया था उसने हमें सुंदर जल,थल और ये आकाश 

    लालच में हमने उन्हें कर दिया बर्बाद 

अब न बचा ये सुंदर संसार ,अब बचा है जो 

वो बन रहा है हमारे विनाश का आधार ।

       दिया है सदैव उसने स्वस्थ जीवन का उपहार 

       दिए हैं शुद्ध फल, शुद्ध जल और ये शुद्ध अनाज

       न किया कोई भेदभाव प्रकृति ने किसी के साथ 

      दिया है सभी को दिल खोल कर अपार

      समता है प्रकृति के देन का आधार 

      यही समता बने उसकी उन्नति का आधार ।

प्राणदायिनी वायु देकर दिया है उसने जीवन का आधार

अन्न -जल से मिटाई है जग की उसने भूख- प्यास 

मान कर अपने बच्चे उसने सुनी है सबकी पुकार 

दिया है उसने अन्न -जल ,जब लगाई है मिलकर गुहार

दो सम्मान उस प्रकृति को ये है उसका मूल अधिकार।

      मिला दिया ज़हर है तूने इस प्रकृति में अपार 

     कर दिया है व्यर्थ तूने अपने जीवन का आधार

    अशुद्ध जल,अशुद्ध वायु और है ये अशुद्ध अनाज 

    बिता रहा है तू जीवन अपना ,अशुद्ध मानव के समान ।

विलुप्त हो गई वनस्पति और नहीं रहे 

  नभचर,जलचर अपार

कट गए जंगल ,बन गए विशाल मकान 

जो बने  दर्शकों के लिए भव्यता की मिसाल

रुक जा मानव, रोक दें ये सब बर्बादी का आधार

यदि न रुका ये बर्बादी का मंजर 

तो न तू रहेगा और न रहेगा तेरे  जीवन का आधार ।

             प्रकृति कर लेगी स्व को पुनः पूर्ण 

            तू खड़ा देखता रह जायेगा अपूर्ण 

            रोक दे विनाश के ये क्रूर रूप

            लौटा दे प्रकृति को पुनः उसका सुंदर स्वरूप।

बना रहेगा जब प्रकृति का शुध्द स्वरूप 

पृथ्वी बन जाएगी पुनः स्वर्ग के समरूप ।।

 

धन्यवाद !



शुक्रवार, 12 जून 2020

शिक्षा के उद्देश्य


आधुनिक युग में शिक्षा  का उद्देश्य ……..


     आज के आधुनिक समय में शिक्षा मानव के जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन गई है । शिक्षा के बिना मानव जीवन निरर्थक सा लगता है । शिक्षित व्यक्ति को सर्वत्र सम्मान मिलता है । उसके ज्ञान की प्रशंसा होती है ।ऐसा कहा जाता है कि बिना ज्ञान मानव जीवन पशु के समान होता है ।यदि आपको परमात्मा द्वारा मानव जीवन प्रदान किया गया है तो उसका सदुपयोग करो और अपने जीवन को सार्थक बनाओ ।

          महान दार्शनिकों ने भी शिक्षा को बहुत महत्त्वपूर्ण बताया है ।गाँधीजी, टैगोरजी,स्वामी विवेकानंदजी जैसे महान दार्शनिकों ने शिक्षा को मानव जीवन का आधार माना है ।गाँधीजी के अनुसार शिक्षा के माध्यम से मानव में तीन एच (three H ) का विकास होना चाहिए ,जो उसने जीवन निर्वाह में सहायक सिद्ध हों ।ये तीन एच हैं - हाथ,हृदय और मस्तिष्क (hand, heart and head).इनके विकास से मनुष्य सोचने,विचार करने ,सही निर्णय लेने तथा अपनी जीविका अर्जित करने में सक्षम हो जाता है ।

         यदि शिक्षा को परिभाषित करें तो ," शिक्षा का अर्थ है -ज्ञान, नैतिक मूल्यों का विकास ,कौशलों का विकास,तार्किक बुद्धि का विकास,सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास और सृजनात्मकता का विकास होना है ।”इन्ही उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सर्वांगीण विकास की अवधारणा का विकास हुआ है । विद्यालयों में छात्रों के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कार्य किया जाता है । संपूर्ण विकास के अंतर्गत विकास के कुछ क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है ,जो इस प्रकार हैं :- 

क) बौद्धिक विकास (Cognitive /Mental development) - शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मानव की बुद्धि का विकास करना और उसे ज्ञान प्रदान करना है ।जब मानव का मानसिक विकास सही प्रकार से होता है तभी उसमें सोचने,समझने,तर्क करने,प्रतिउत्तर करने ,नई खोज करने और सही समय पर सही निर्णय लेने की शक्ति का विकास होता है । शिक्षा का अर्थ सिर्फ विद्यालय जाकर ग्रहण की गई शिक्षा से नहीं है बल्कि हम प्रतिदिन अपने आस -पास की घटनाओं से जो सीखते हैं वह भी उपयोगी ज्ञान होता है । ज्ञान किसी से भी और कहीं से भी प्राप्त किया जा सकता है परंतु वह ज्ञान हमारी उन्नति करें न की हमें हमारे सद्कर्मों और उचित मार्गों से भटका दे।ज्ञान या शिक्षा का उद्देश्य हमें सही और उपयोगी मार्ग दिखाना हो जो हमारे आने वाले भविष्य को अर्थपूर्ण बनाए ।

ख) नैतिक विकास (Moral development)किसी मानव और पशु के मध्य विभेद उसने व्यवहार के आधार पर किया जाता है ।मानव द्वारा किया जाने वाला व्यवहार नैतिक रूप से सही और सर्वमान्य होना चाहिए ।किसी भी व्यक्ति के अच्छा और बुरा उसके द्वारा किए गए आचरण के आधार पर ही माना जाता है ,अर्थात प्रत्येक मनुष्य में नैतिक मूल्यों का विकास होना चाहिए और उसे उन्हीं के अनुसार अपना आचरण रखना चाहिए। बालक में नैतिक मूल्यों का विकास करना भी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य माना जाता है ।जॉन लॉक (John Locke ) द्वारा ऐसा कहा  है कि बालक एक कोरी स्लेट की तरह होता है उस पर जैसे चाहो वैसे लिख सकते हो ।हमने भी अपने बड़े -बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि बच्चे तो कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं ।ऐसा मानना काफी हद तक सही भी है ,एक बच्चा जैसा देखता है वह वैसा ही व्यवहार करने लगता है ।अतः बच्चे में नैतिकता विकसित करने के लिए यह आवश्यक है कि उसके सामने नैतिकता ही प्रस्तुत की जाए । घर में सभी को बड़े - बुजुर्गों का  सम्मान करना,छोटे सदस्यों के प्रति प्रेम भाव रखना और किसी का भी अपमान नहीं करना चाहिए। विद्यालय में भी सभी को समान दृष्टि से देखना चाहिए ।किसी भी प्रकार का भेदभाव विद्यार्थियों के साथ नहीं होना चाहिए ।विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास करना विद्यालय की भी जिम्मेदारी है।

ग) सही मानसिकता का विकास (Psychological development)- आधुनिक समय में विकृत मानसिकता के उदाहरण आए दिन देखने को मिलते ही रहते हैं ।बच्चों में बचपन से ही सही सोच विकसित करना आवश्यक है ।उन्हें बालपन से ही सभी को समान मानने आउट सभी को सम्मान की दृष्टि से देखने की शिक्षा देनी चाहिए ।शिक्षा देने का अर्थ यह नहीं कि हम उन्हें प्रतिदिन भाषण सुनाए बल्कि हमें अपना व्यवहार उस प्रकार का करना चाहिए ताकि बच्चे हमें आदर्श के रूप में देखें ।घरों में कभी भी लड़का -लड़की में भेदभाव नहीं करना ,घर की महिलाओं को सम्मान देना ,बड़े -बुजुर्गों को इज़्ज़त देना ,गरीबों और  कमज़ोरों का अपमान न करना आदि ,ऐसे तरीके हैं जिनसे बच्चों में सही मानसिकता का विकास होता है । 

घ) शारीरिक विकास (Physical development)-स्वथ्य तन  में ही स्वथ्य मन का वास होता है " यह कहावत बहुत पुरानी हो गई है परंतु यह आज भी तर्कसंगत है । यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं है तो वह मानसिक रूप से भी स्थिर नहीं हो सकता । विद्यालयों में दी जाने वाली शिक्षा में सिर्फ पढ़ने पर और अवधारधाओं को याद करने पर जोर दिया जाता है । बच्चों के शारीरिक विकास को नजरअंदाज कर दिया जाता है ।आज के आधुनिक युग में पढ़ाई के साथ -साथ स्वास्थ्य भी बहुत महत्त्वपूर्ण है ,इसलिए विद्यालयों में बच्चों के शारीरिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए । उन्हें खेलने के लिए उचित मैदान उपलब्ध होना चाहिए ,कुछ शारीरिक व्यायाम भी प्रतिदिन कराए जाने चाहिए और  उन्हें जो खेल पसंन्द हो उसे खेलने के उचित अवसर प्रदान कराने चाहिए । मानसिक विकास के साथ -साथ शारीरिक क्षमता का भी विकसित होने अति आवश्यक है ।

ङ) तार्किक क्षमता का विकास (Development of critical /logical thinking ) - बालकों में तार्किक क्षमता का विकास होना बहुत महत्त्वपूर्ण है । यदि बच्चा तर्क करना नहीं जानता होगा तो वह किसी भी विषय पर अपने विचार व्यक्त करने में असमर्थ होगा । उसे सही और गलत के बीच भेद करना नहीं आ सकेगा । एक योग्य मनुष्य के लिए यह आवश्यक है कि वह प्रत्येक घटना पर अपने विचार व्यक्त कर सके ।बच्चों में प्रश्न करने की क्षमता ,तर्क करने की क्षमता और सही और गलत में विभेद करने की क्षमता का विकास करना भी   शिक्षा के अंतर्गत आता है । एक शिक्षित बालक को ये सभी कार्य भलीभाँति करने आने चाहिए । यह अपनी बुद्धि का प्रयोग करके जो सभी के लिए उचित हो वह निर्णय लेने में सक्षम हो ।शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं है ,बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देने भी है ।

च) सृजनात्मकता का विकास (Development of creativity ) -  शिक्षा के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता का विकास होना चाहिए ।वे नए -नए कार्य कर सकें और कुछ नई खोज करके मानव समाज का कल्याण करें । शिक्षा का उद्देश्य  बच्चों को सिर्फ किताबों के ज्ञान तक ही सीमित रखना नहीं,बल्कि उन्हें अपनी सृजनात्मकता का विकास करने के संपूर्ण अवसर प्रदान करना होना  चाहिए ।सभी बच्चों में सृजन क्षमता होती है बस उसे उभारने और निखारने की आवश्यकता होती है । विद्यालयों में बच्चों को इन छुपी हुई प्रतिभाओं का विकास करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए । विद्यायल अलग -अलग प्रकार के आयोजनों के माध्यम से इन प्रतिभाशाली बालकों को आगे बढ़ने के अवसर दे सकता है ।

        आज के समय में बालकों में नैतिक मूल्यों का ह्रास होता जा रहा है  ।आज के समय में नैतिक मूल्यों का विकास करना प्राथिमकता हो गई है। बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास करने की ज़िम्मेदारी परिवार और विद्यालय दोनों की समान रूप से है ।अतः दोनों को मिलकर ही इस ज़िम्मेदारी का निर्वाह करना होगा ।

      आशा करती हूँ कि आप मेरे विचारों से सहमत होंगे ।

धन्यवाद !

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