बुधवार, 3 जून 2020

बेटा और उसकी शादी



बेटा और उसकी शादी ……..

बेटा है चिराग ,कुलदीपक है परिवार का 

बचपन से ही बना दिया उसे जिम्मेदार घर -वार का 

छीन लिया बचपन ,और उसका बचपना 

दे दिया हवाला इस महान समाज का 


जो दिखाया ,जो सिखाया 

वो देखा और वही सीखता चला गया 

अपनी इच्छा का गला घोंटता चला गया 

मर्द  नाम का तमका लिए बढ़ा चला 

अपनी आशाओं और इच्छाओं को रौंदकर 

समाज के नियमों को निभाता चला गया 


       मानविक गुणों से दूर उसे कर दिया 

मर्द है तू मर्द है यही मस्तिष्क में भर दिया 

क्रोध तेरा आभूषण है ,मान है सम्मान है 

अश्रु बहाना तेरे लिए मृत्यु के समान है 

खोता चला गया भावनाएँ ,अब खड़ा लाचार है 

बन सका है सिर्फ मर्द ,न बन सका भावपूर्ण इंसान है 

         

  जब बड़ा हुआ ,विवाह हुआ ,तब भी एक विवाद हुआ 

कर ली पसंन्द अपनी पत्नी ,ये बड़ा अपराध हुआ 

माँ - बाप की इज़्ज़त गई ,और बड़ा आघात हुआ 

मेरा लड़का करोड़ों की जगह ,बिन दहेज़ विहाया गया

सही मोल न लगा मेरे बेटे का ,कैसा ये अपमान हुआ ?


बेटा भी इंसान है ,उसे इंसान ही रहने दो 

विवाह में उसका मोल न लगाओ 

उसका भी आत्मसम्मान रहने दो ।



धन्यवाद !



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