लड़की : दुर्बल नहीं , सक्षम है
लड़की होना अपराध नहीं
कन्या कोई श्राप नहीं
जीवन है उनका उन्हें जीने दो
उनका जीवन छीनने का
किसी को यह अधिकार नहीं ।
विडंबना है परिवार की और इस समाज की
पूजन देवी का और अपमान बेटी का
कोई नहीं चाहता बेटी का जन्म परिवार में
पर नवरात्र में कंजक खिलाना है हर घर -परिवार में
जब जीवन ही नहीं दोगे लड़की को
फिर कंजक कहाँ से आयँगी
सुधर जाओ ये समाज के ठेकेदारों
वरना ये धरती कन्या बिन सुनी रह जायेगी ।
आज का समाज आधुनिक है यह विचार है
पर कितना आधुनिक है यह एक सवाल है
लड़कियों पर अभी भी नियम-कानून का अंबार है
देते हैं नाम संस्कारों का ,और लगाते बंधन अपार हैं
हर काम ,हर बात और यहाँ तक की
बात करने का लहज़ा और पहनने के लिवाज़
निर्धारित कर देता ये बेआधार समाज है ।
लड़की पढ़ रही है , आगे बढ़ रही है
सब जगह यही सुनाई पड़ता है
पढ़ने और आगे बढ़ने का क्या अर्थ रहता है
जब मोटा दहेज देकर ही
बेटी का ब्याह करना पड़ता है
लड़की की काबिलियत को दरकिनार कर
जब सुंदरता को आंका जाता है
तब उस के मष्तिष्क पर क्या आघात होता है ?
इस पर विचार को आधारहीन समझा जाता है ।
लड़की के पढ़ने पर और नौकरी करने पर भी
उसे सामाजिक और पारिवारिक दायित्व
याद दिलाए जाते हैं -
पढ़ना-लिखना अपनी जगह है ,
पर खाना पकाना तो तेरा फ़र्ज़ है
ये फ़र्ज़ की दुहाई ही देते रहते है
पर हक की बात को बुराई कहते है
नौकरी करने पर क्या खाना नहीं बनाना पड़ता है
खुद पर दोहरा बोझ लेकर ही
नौकरी जाना पड़ता है।
मानसिकता अभी भी दोगली है ,
लड़की रात तक काम करे तो सवाल हैं
लड़के करें तो मेहनती लाल हैं
नौकरी भी निर्धारित कर रखी है समाज ने
शिक्षिका होना तो सबसे महान है पर
कम्पनी में काम करना तो
चरित्र हीनता जा प्रमाण है
ये सही है ,वो गलत है
यही नौकरी का आधार है ।
लड़कियाँ लड़कों के समान हैं
यह कहना सरासर लड़कियों का अपमान है
उनका खुद कोई वजूद नहीं ?
लड़के ही क्या उनका आधार हैं
जिन्हें जन्म देती हैं वो
वही उनकी पहचान छीन ले जाते हैं
जो जन्म देकर रक्षा कर सकती है लड़कों की
क्या वो स्वयं की रक्षा में इतनी लाचार है
यह मानसिकता की तुच्छ सोच है
लड़की सक्षम है न कि लाचार है !
धन्यवाद !
Very nyc*
जवाब देंहटाएंReally touching poem, so nice
जवाब देंहटाएं