दिया था उसने हमें सुंदर जल,थल और ये आकाश
लालच में हमने उन्हें कर दिया बर्बाद
अब न बचा ये सुंदर संसार ,अब बचा है जो
वो बन रहा है हमारे विनाश का आधार ।
दिया है सदैव उसने स्वस्थ जीवन का उपहार
दिए हैं शुद्ध फल, शुद्ध जल और ये शुद्ध अनाज
न किया कोई भेदभाव प्रकृति ने किसी के साथ
दिया है सभी को दिल खोल कर अपार
समता है प्रकृति के देन का आधार
यही समता बने उसकी उन्नति का आधार ।
प्राणदायिनी वायु देकर दिया है उसने जीवन का आधार
अन्न -जल से मिटाई है जग की उसने भूख- प्यास
मान कर अपने बच्चे उसने सुनी है सबकी पुकार
दिया है उसने अन्न -जल ,जब लगाई है मिलकर गुहार
दो सम्मान उस प्रकृति को ये है उसका मूल अधिकार।
मिला दिया ज़हर है तूने इस प्रकृति में अपार
कर दिया है व्यर्थ तूने अपने जीवन का आधार
अशुद्ध जल,अशुद्ध वायु और है ये अशुद्ध अनाज
बिता रहा है तू जीवन अपना ,अशुद्ध मानव के समान ।
विलुप्त हो गई वनस्पति और नहीं रहे
नभचर,जलचर अपार
कट गए जंगल ,बन गए विशाल मकान
जो बने दर्शकों के लिए भव्यता की मिसाल
रुक जा मानव, रोक दें ये सब बर्बादी का आधार
यदि न रुका ये बर्बादी का मंजर
तो न तू रहेगा और न रहेगा तेरे जीवन का आधार ।
प्रकृति कर लेगी स्व को पुनः पूर्ण
तू खड़ा देखता रह जायेगा अपूर्ण
रोक दे विनाश के ये क्रूर रूप
लौटा दे प्रकृति को पुनः उसका सुंदर स्वरूप।
बना रहेगा जब प्रकृति का शुध्द स्वरूप
पृथ्वी बन जाएगी पुनः स्वर्ग के समरूप ।।
धन्यवाद !

NYC lines....
जवाब देंहटाएंWell said
जवाब देंहटाएंDo not destroy it.
जवाब देंहटाएंsahi hai
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